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Current Affairs : न्‍यायमूर्ति रंजन गोगोई और रिएक्टर “अप्सराउन्नत”

◆ न्‍यायमूर्ति रंजन गोगोई भारत के अगले मुख्‍य न्‍यायाधीश नियुक्‍त

राष्‍ट्रपति ने न्‍यायमूर्ति रंजन गोगोई को भारत का अगला मुख्‍य न्‍यायाधीश नियुक्‍त किया है। वह देश के वर्तमान मुख्‍य न्‍यायाधीश न्‍यायमूर्ति दीपक मिश्रा के सेवानिवृत्‍त होने के बाद 3 अक्‍तूबर, 2018 को भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश का पद भार ग्रहण करेंगे। वह सुप्रीम कोर्ट के 46वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) होंगे।


न्‍यायमूर्ति रंजन गोगोई के बारे में :

न्‍यायमूर्ति रंजन गोगोई का जन्‍म 18 नवंबर, 1954 को हुआ और वह 1978 में एक अधिवक्‍ता के रूप में नामांकित हुए। उन्‍होंने गुवाहाटी उच्‍च न्‍यायालय में संवैधानिक, कराधान एवं कंपनी मामलों पर प्रैक्टिस शुरु की। उन्‍हें 28 फरवरी, 2001 को गुवाहाटी उच्‍च न्‍यायालय में स्‍थायी न्‍यायाधीश नियुक्‍त किया गया। 9 सितंबर, 2010 को उन्‍हें पंजाब एवं हरियाणा उच्‍च न्‍यायालय में स्‍थानांतरित किया गया। 12 फरवरी, 2011 को उन्‍हें पंजाब एवं हरियाणा उच्‍च न्‍यायालय का मुख्‍य न्‍यायाधीश नियुक्‍त किया गया। 23 अप्रैल, 2012 को उन्‍हें भारत के सर्वोच्‍च न्‍यायालय के एक न्‍यायाधीश के रूप में नियुक्‍त किया गया।    

 

◆ रिएक्टर “अप्सराउन्नत” का परिचालन प्रारंभ हुआ

भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी जे भाभा ने 50 के दशक में कहा था कि अनुसंधान रिएक्टर परमाणु कार्यक्रम की रीढ़ की हड्डी होती हैं। इसके बाद एशिया के पहले अनुसंधान रिएक्टर “अप्सरा” का परिचालन अगस्त 1956 में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के ट्रॉम्बे परिसर में शुरू हुआ। शोधकर्ताओं को पांच दशक से अधिक समय तक समर्पित सेवा प्रदान करने के बाद इस रिएक्टर को 2009 में बंद कर दिया गया।


अप्सरा के अस्तित्व में आने के लगभग 62 सालों के पश्चात 10 सितंबर 2018 को 18:41 बजे ट्रॉम्बे में स्विमिंग पूल के आकार का एक शोध रिएक्टर “अप्सरा-उन्नत” का परिचालन प्रारंभ हुआ। उच्च क्षमता वाले इस रिएक्टर की स्थापना स्वदेशी तकनीक से की गई है। इसमें निम्न परिष्कृत यूरेनियम (एलईयू) से निर्मित प्लेट के आकार का प्रकीर्णन ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है। उच्च न्यूट्रॉन प्रवाह के कारण यह रिएक्टर स्वास्थ्य अनुप्रयोग में रेडियो-आइसोटोप के स्वदेशी उत्पादन को 50 प्रतिशत तक बढ़ा देगा। इसका उपयोग नाभिकीय भौतिकी, भौतिक विज्ञान और रेडियोधर्मी आवरण के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर किया जाएगा।

इस निर्माण ने भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की क्षमता को फिर से रेखांकित किया है कि वे स्वास्थ्य देखभाल, विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में जटिल सुविधाओं वाली संरचना का निर्माण कर सकते हैं।

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Sahil Bhatiya

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